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कर्नाटक में भाजपा सफलता से राजस्थान में वसुंधरा राजे की राह कठिन। उपचुनाव में भाजपा नहीं वसुंधरा राजे हारीं। ओम माथुर, मेघवाल आदि नेता अमित शाह से मिले।


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कर्नाटक में भाजपा सफलता से राजस्थान में वसुंधरा राजे की राह कठिन। उपचुनाव में भाजपा नहीं वसुंधरा राजे हारीं। ओम माथुर, मेघवाल आदि नेता अमित शाह से मिले।
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15 मई को कर्नाटक में नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को जो सफलता मिली है, उससे राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की राह कठिन हो गई है, सब जानते हैं कि वसुंधरा राजे के वीटो पावर से प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष की घोषणा अटकी पड़ी है। मोदी और अमित शाह वाला भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व गजेन्द्र सिंह शेखावत को अध्यक्ष घोषित कर रहा था, लेकिन वसुंधरा राजे ने पूरी ताकत लगा कर घोषणा को रुकवा दिया। इस मुद्दे पर गत 26 अप्रैल को दिल्ली में अमित शाह और वसुंधरा राजे के बीच कोई तीन घंटे तक वार्ता भी हो चुकी थी, तब यह तय हुआ कि कर्नाटक के चुनाव के बाद इस मुद्दे पर निर्णय लिया जाएगा। तब यह माना गया कि यदि कर्नाटक में भाजपा को बहुमत नहीं मिलता है तो वसुंधरा राजे और मजबूत होगी, लेकिन यदि भाजपा को पूर्ण बहुमत मिल जाता है तो यह माना जाएगा कि नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के निर्णय ही सफलता दिलवाते हैं। वसुंधरा राजे प्रदेश अध्यक्ष को लेकर कुछ भी तर्क दे लेकिन आंकलन तो मोदी और शाह का ही सही होता है। ऐसे में अब वसुंधरा राजे को अपनी स्थिति का फिर से विचार करना चाहिए। कर्नाटक चुनाव के परिणाम इस बात की ओर से इशारा करते हैं कि राजस्थान में लोकसभा के उपचुनावों में भाजपा नहीं वसुंधरा राजे हारी थी। दो लोकसभा और एक विधानसभा के उपचुनाव में तीन उम्मीदवार तय करने से लेकर सम्पूर्ण चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी राजे को ही दी गई। केन्द्रीय नेतृत्व ने इन उपचुनावों में कोई दखल नहीं दिया, यही माना गया कि वसुंधरा राजे स्वयं चुनाव लड़ रही है। लेकिन वसुंधरा राजे के उम्मीदवारों की एक स्थान पर भी जीत नहीं हुई, पूरा चुनाव कांग्रेस और वसुंधरा राजे के बीच लड़ा गया। परिणाम बताते हैं कि वसुंधरा राजे हार गई। अब राजस्थान में नवम्बर में विधानसभा के चुनाव होने हैं। नरेन्द्र मोदी और अमितशाह राजस्थान में भाजपा की हार नहीं चाहते है। जब कर्नाटक में विपरित परिस्थितियों में जीत हासिल की जा सकती है तो फिर हिन्दी भाषी और नरेन्द्र मोदी के प्रभाव वाले राजस्थान में क्यों नहीं? मोदी और शाह की जोड़ी को पता है कि राजस्थान में जीत कैसे हासिल की जाएगी। इसलिए गजेन्द्र सिंह शेखावत को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा रहा है। अच्छा हो कि वसुंधरा राजे समय और माहौल की नजाकत को समझे अब जिद करने से कोई फायदा होने वाला नहीं है।
माथुर और मेघवाल ने की मुलाकातः
15 मई को कर्नाटक चुनाव में जीत के जश्न के माहौल के बीच राजस्थान के दिग्गज नेता और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर तथा केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल ने दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितशाह से मुलाकात की। सब जानते हैं कि राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा राजे और ओम माथुर के बीच 36 का आंकड़ा है। इसी प्रकार पिछले दिनों मुख्यमंत्री के तौर पर अर्जुन मेघवाल के नाम की चर्चा राजनीतिक गलियारों में हुई थी। इसके बाद से ही वसुंधरा राजे और मेघवाल में दूरिया बढ़ गई।
एस.पी.मित्तल) (15-05-18)
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