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40 दिवसीय उपवास तथा (पाम संडे) खजूर का रविवार, ऐतिहासिक विवरण तथा वर्तमान महत्व


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एवंजेलिस्ट प्रीतेश जॉन (मैकेनिकल इंजीनियर)

25 मार्च मसीह समाज पूरे वर्ष में दो महत्वपूर्ण पर्वों को मनाता है जिसमें वे परमेश्वर के पुत्र ईसा मसीह के जीवन की दो महत्वपूर्ण प्रसंग को याद करते है। पहला है ईसा मसीह का जन्म, जिसे प्रति वर्ष 25 दिसम्बर के दिन सम्पूर्ण विश्व में क्रिसमस (ख्रीस्त जयंती) के रूप में मनाया जाता है तथा दूसरा है ईसा मसीह का बलिदान तथा पुनरुथान दिवस, जिसे गुडफ्राइडे (शुभ शुक्रवार) तथा ईस्टर (पुनरुथान दिवस) के रूप में मनाया जाता है।  इस लेख में हम गुडफ्राइडे (शुभ शुक्रवार) तथा ईस्टर (पुनरुथान दिवस) के पूर्व के घटनाक्रम तथा आयोजनों के बारे में बातचीत करेंगे जिसके अंतर्गत हम 40 दिवसीय उपवास काल तथा पाम सन्डे (खजूर का रविवार) के विषय में देखेंगे।

एक ईसा मसीह के अनुयायी के लिए ईसा मसीह के बलिदान तथा पुनरुथान को याद करना एक विजय उत्सव मनाने के सामान होता है और इस पर्व की तैयारी की शुरुआत लगभग डेढ़ माह पूर्व एश वेडनेसडे (राख का बुधवार) से होती है।  एश वेडनेसडे (राख का बुधवार) से मसीह समाज के लोग अपने 40 दिवसीय उपवास (लेंट डेज़) को आरम्भ करते है। मसीह लोग इन लेंट डेज की तुलना ईसा मसीह के 40 दिवसीय उपवास काल से करते है जो उन्होंने अपनी सेवकाई आरम्भ करने से पूर्व किए थे ।  लेंट डेज़ (उपवास काल) को मसीह समाज के लोग तैयारी के दिन के रूप में देखते है इन दिनों में वे अपने आध्यात्मिक जीवन का निरीक्षण करते है तथा उपवास के साथ अपने जीवन की कमियों तथा बुरी बातों को त्यागने का प्रयास करते है।  इन 40 दिनों में प्रतिदिन घरों में प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया जाता है जिनमें लोग आपस में मिल के ईश्वर को याद करते है तथा परमेश्वर के वचन पर ध्यान करते है।

ईस्टर (पुनरुथान दिवस) के पूर्व का रविवार पाम सन्डे (खजूर के रविवार) के रूप में मनाया जाता है। जब ईसा मसीह अपने बलिदान से पूर्व यरूशलेम में प्रवेश करते है तो उस समय के लोग उनका एक राजा के रूप में स्वागत करते है। वे अपने कपड़ों को तथा खजूर की शाखाओं को ईसा मसीह के आगे बिछाते हुए तथा होसन्ना धन्य है वो जो प्रभु यीशु के नाम से आता है के नारे लगते हुए ईसा मसीह का अभिनंदन करते है। वर्तमान समय में भी विभिन्न स्थानों पर मसीह समाज के लोग इसी प्रकार से ईसा मसीह की याद में उन्हें राजा की उपाधि देते हुए जुलूस निकलते है जिसमें वे खजूर की शाखाएँ लेते हुए व गीत गाते हुए तथा हाल्लेलुयाह होसन्ना के नारे लगाते हुए ईसा मसीह का अभिनंदन करते है।

वर्तमान समय की बात की जाए तो सम्पूर्ण संसार भौतिकता की विचारधारा की कैद में है, जहाँ आध्यात्मिकता एक दिनचर्या न हो कर महज़ एक रीत का रूप ले चुकी है।  मनुष्य अपने अन्दर छुपे ईश्वरत्व के सत्य से अनभिज्ञ है ऐसे में ये 40 दिवसीय उपवास एक मनुष्य को अवसर प्रदान करते है की वे अपने अन्दर ईश्वरीय अंश की अनुभूति करें तथा अपने अन्दर के भ्रष्ट स्वभाव का त्याग करें तथा खजूर का रविवार अपने जीवन पर ईश्वरीय स्वामित्व को स्वीकारने का एक अवसर होता है कि हम अपने जीवन में परमेश्वर ईसा मसीह को एक राजा के रूप में स्वीकार करें तथा उसे अपने जीवन के ऊपर नियंत्रण दे। 





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